कैसे भर जाते हैं जख्म?

जैसे ही त्वजा पर कोई कट लगता है, कटी हुई रक्त वाहिनी से रक्त बाहर आने लगता है तथा रक्त में मौजूद फिबरिन नामक प्रोटीन लम्बे तन्तु बनाने लगती है। जो आपस में मिलकर थक्का बुन लेते है। थक्का घाव को ढककर रक्त प्रवाह को बंद कर देता है। रक्त का थक्का बनने के साथ-साथ श्वेत रुधिर कणिकाएं भी घाव में आ जाती है तथा अन्दर प्रवेश करने वाले जीवाणु पर आक्रमण कर उन्हें नष्ट कर देती है। थक्के के नीचे कट के किनारों पर कोशिकायें शीघ्रता से विभाजित होने लगती है तथा कटके ऊपर आवरण बनाने लगती है। चार पाँच दिन में यह आवरण मोटा होकर त्वजा की नई परत बना देता है तथा घाव भरने की क्रिया पूरा होने के बाद एक शुष्क पपड़ी उतर जाती है

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